Friday, 2 November 2012

दूब पर चांदनी ...

रश्मि
रंगीन हो चमक उठी
लाल पीले हरे रंगों में
धूप पसरी
और जा बिछी
घास घनी
लम्बी हो ढल गयी

 एक चादर
यादों की लिए
अब हम तुम- चलो
 उन फूलों के बीच
चांदनी उतारें

~Rashmi~


5 comments:

  1. हाँ......
    चाँदनी में नहाना....प्रेम की अगन से कुछ सुकून तो मिले...

    :-)
    सस्नेह
    अनु

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  2. वाह, बहुत खूब
    रशमी जी आपका ब्लॉग बहुत पसंद आया

    फुर्सत मिले तो .....मुस्कराहट पर ज़रूर आईये

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