जान फूंकी थी इस दिल में
मुझे उबारा था
मेरे ही अंतर में कहीं से
अपना-मेरा वो हिस्सा
मुझे नज़र कर दो
न रही मेरी अपनी
तुम्हारा दिया उधार है
ये ज़िन्दगी
बस एक अहसान और कर दो
मांगती हूँ अपना-तुम्हारा
बस एक दिन .. और एक रात
मेरे नाम कर दो
न कोई कागज़ ,वसीयत
कोई रियासत
बस दिल का कोना
मेरे जिस्म और रूह पर
अपनी मुहर कर दो
अपनी छूअन से मुझे अंगार कर दो
मेरे इस मन से, मुझे आजाद कर दो
रखा तुम्हारे साथ
खर्च करने की आरज़ू में
बस एक दिन ..और एक रात
..........मेरे नाम कर दो
~Rashmi~
इतनी सी आरज़ू.....
ReplyDeleteऔर उम्र निकल गयी.......
बहुत खूबसूरत चाह है रश्मि....
सस्नेह
अनु
simple wish
DeleteNo words to say what I'd like to....
ReplyDeleteunsaid words say a lot Aparna
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