Saturday, 15 December 2012

मेरा इश्क ...



मेरा इश्क 

किसी इकरार का 
इंतज़ारमंद 
कोई मुसाफिर नहीं 
न आकांक्षा में लिखी 
कोई रचना 


मेरा इश्क़  

है मनचाहे उगने वाला 

इन्द्रधनुष


सोची समझी
ज़मीन सींचने वाली कोई नहर नहीं 
मनचाही राह बहने वाली
समुद्र में मिलने को आतुर
है ये नदी 


मेरा इश्क़

~Rashmi~

2 comments:

  1. These lines are so profound,
    "न प्रकाशित होने की
    आकांक्षा में लिखी
    कोई रचना "

    Beautiful creation!

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  2. "मनचाहे उगने वाला
    इन्द्रधनुष है"

    अनूठे बिम्ब - बहुत खूब

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