Thursday, 11 October 2012

रंग...


ज़िन्दगी में,सरेराह चलते चलते
मैं खुद से मिली
जब तुम आ गए आइना बनके
प्रतिबिम्ब अपना दिखा
और खुद से इश्क हो गया

ये  श्वेत धवल मन
उजला हुआ तुमसे मिल
ये रंग बिरंग मन
बिखर जाता तेरे बिन

मेरा जो रंग तुझ पर चढ़ा
वो सतरंगी हो मुझ पर उतरा
उस कोरी सी ज़िन्दगी में
हमने एक दूजे का रंग भरा

...इन रंगों को अब फीका पड़ने न देना
    मुझे खुद से जुदा अब होने न देना

~Rashmi~

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