किसी ने मेरे ग्रह पढ़ कर कहा कि मैं रीत-रिवाज़ मानने वाली लड़की नहीं हूँ...
पर मैं तो रीत का ही प्यार करती हूँ...
इक रीत है
नदी होती है अवतरित
बहाई नहीं जाती
इक रीत है
ग्लेशिअर पिघल कर बहता है
जमाया नहीं जाता
इक रीत है
बादल उमड़ते हैं
बारिश बरसाई नहीं जाती
इक रीत है
मन भीगता है
सुखाया नहीं जाता
वैसी ही इक रीत है
प्यार...
होता है किया नहीं जाता
बहता है जमाया नहीं जाता
उमड़ता है बरसाया नहीं जाता
भीगता है,लाख सुखाये, सुखाया नहीं जाता
है न...ऐसी इक रीत...और रीत का प्यार
पर मैं तो रीत का ही प्यार करती हूँ...
इक रीत है
नदी होती है अवतरित
बहाई नहीं जाती
इक रीत है
ग्लेशिअर पिघल कर बहता है
जमाया नहीं जाता
इक रीत है
बादल उमड़ते हैं
बारिश बरसाई नहीं जाती
इक रीत है
मन भीगता है
सुखाया नहीं जाता
वैसी ही इक रीत है
प्यार...
होता है किया नहीं जाता
बहता है जमाया नहीं जाता
उमड़ता है बरसाया नहीं जाता
भीगता है,लाख सुखाये, सुखाया नहीं जाता
है न...ऐसी इक रीत...और रीत का प्यार
बहुत सुन्दर........
ReplyDeleteप्यार से प्यारी कोई रीत कहाँ.....
वाह!!!
अनु
बस हम तो रीत निभाते चलते हैं
ReplyDeleteदुनिया हमें समझदारी का ज्ञान दे जाती है....
thank u minidi